Himanshu Yadav मेरा प्रिय नेता निबंध | Mera Priya Neta Nibandh (Essay) | StatusWhatsapp.IN - Download Whatsapp Status Video - Love | Attitude | Sad | Romantic | Tamil | Bhojpuri | Marathi

मेरा प्रिय नेता निबंध | Mera Priya Neta Nibandh (Essay) | StatusWhatsapp.IN

मेरा प्रिय नेता



       भारत महापुरुषों का देश है।  बाल गंगाधर तिलक, महादेव गोविन्द रानाडे, गोपालकृष्ण गोकले, महात्मा गाँधी, सरदार वल्लभाई पटेल, सुभाषचंद्र बोस, जवाहरलाल नेहरू आदि अनेक नेताओ ने हमारे इतिहास की शोभा बड़ाई है। इन सभी के प्रति मई पूरा आदरभाव रखता हूँ, परन्तु मेरे सबसे अधिक  प्रिय नेता तो राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ही है।
       गाँधी में नेतृत्वा की अद्भुत क्षमता थी। सीधी सादी सरल भाषा में दिए गए उनके भाषण देशवासियो पर जादू का-सा असर करते थे।  उनकी एक पुकार पर आज़ादी के दीवानो की टोलियाँ मातृभूमि पर बलिदान देने के लिए निकल पड़ती थीं। पच्चीस वर्षों से भी अधिक समय तक उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्धा कई अहिंसक आंदोलन चलाये। अंत में अंगेजी शासको की लाठिया, बंदूकों, तोपों और बमो पर अहिंसा ने विजय पाई ! सर्दियों से गुलाम रहा भारत आज़ाद हुआ। इसीलिए गांधीजी  'युगपुरुष' कहलाये। 
       गांधीजी आज के मत बटोरने वाले नेताओ की तरह दिखवा पसंद नहीं करते थे।  उनके मन, वचन और कर्मा में एकरूपता थी। गाँधी जी में देशसेवा की सच्ची लगन थी। वे लोकसेवा के बल पर नेता बने थे। सचमुच, वे एक आदर्श नेता थे। 
          भारत को स्वतंत्र कराना गांधीजी का सबसे प्रमुख लक्ष्य था, किन्तु उनके प्रयत्न इस लक्ष्य तक ही सिमित नहीं रहे।  वे इस देश में रामराज्य देखना चाहते थे, इसलिए उन्होंने समाज-सुधार का कार्य किया।  उन्होंने गरीब भारत को तकली और चरखे द्वारा रोज़ी रोटी दी। सराब बंदी, निरछरता-निवारण, स्त्री-शिछा, ग्रामोद्धार आदि के लिए उन्होंने अथक प्रयत्न किये। देश को एक सूत्र में बांधने के लिए उन्होंने राष्ट्र्भाषा का प्रचार किया। हिन्दू -मुस्लिम एकता के लिए वे आजीवन प्रयत्ना करते रहे। उन्होंने अछूतो को 'हरिजन' नाम देकर उनका सम्मान किया।
          गांधीजी  सत्य और अहिंसा के पुजारी थे। उनके जीवन में सादगी थी। दुर्बल शरीर और घुटनो तक ऊँची धोती पहनने वाले गांधीजी भारत को आम जनता के प्रतीक थे। उनके हृदय से दया, धर्म और प्रेम की त्रिवेणी लगातार बहती रहती थी। इस अर्थ में वे सचमुच 'महात्मा' थे। जिस तरह एक पिता अपने परिवार को सुखी देखना चाहता है, उसी तरह गांधीजी सारे देश को सुखी और समृद्धि देखना चाहते थे। इसीलिए लोगो ने उन्हें 'राष्ट्र'पिता' कहकर उनका आदर किया। सचमुच, वे सारे देश के प्यारे 'बापू' थे।  
         गांधी जी ने अपना सब न्योछावर कर भारत का नवनिर्माण किया। वे भारत के ही नहीं, सारे विश्व के नेता थे। ऐसे महान देशभक्त और महामानव को यदि मैं अपना प्रिय नेता मानू तो इसमें आश्चर्य ही क्या है ! 

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