Himanshu Yadav मेरा प्रिय हिंदी लेखक निबंध | Mera Priya Hindi Lekhak Nibandh (Essay) | StatusWhatsapp.IN - Download Whatsapp Status Video - Love | Attitude | Sad | Romantic | Tamil | Bhojpuri | Marathi

मेरा प्रिय हिंदी लेखक निबंध | Mera Priya Hindi Lekhak Nibandh (Essay) | StatusWhatsapp.IN



मेरा प्रिय हिंदी लेखक




             हिंदी में अनेक महान लेखक है। सबकी अपनी अपनी विशेषता है। उन्होंने उत्तम कोटि के साहित्य का निर्माण कर सारे संसार में नाम कमाया है। किन्तु इन सबमे मुझे सबसे अधिक प्रिय है हिंदी कथा-साहित्य के  उपन्यास सम्राट मुंसी प्रेमचंद्र जी।

            प्रेमचंद्र जी लोकजीवन के कथाकार है। किसानो, हरजनो और दलितों के जीवन पर उन्होंने अपनी कलम चलाई है।  किसने के दुःख, उनके जीवन-संघर्ष, उन पर  जमींदारों के होनेवाले जुल्म आदि को उन्होंने स्वाभाविक संग से पढ़े-लिखे  समाज के सामने रखा है। उन्होंने भारतीय किसानो के अंधविश्वास, अशिक्षा, करुणा, प्रेम और सहानभूति के भी वास्तविक चित्र प्रस्तुत किये है। इस प्रकार प्रेमचंद्र जी का साहित्य भारत के ग्रामीण जीवन का दर्पण है।

            प्रेमचंद्र जी की कहानिया सरल, और मार्मिक है। 'कफन', 'बोध', 'ईदगाह', 'सुजान भगत', 'नमक का दरोगा', 'शतरंज के खिलाडी', 'बड़े घर की बेटी', 'दूध का दाम', 'पूस  की रात' आदि कहानियो में प्रेमचंद्र जी की स्वाभाविक और रोचक शैली  के दर्शन होते है।  उनके उपन्यास भी बेजोड़ है। 'गोदान 'तो किसानो के जीवन का महाकाव्य ही है। 'गबन' में मध्यवर्ग के समाज  मार्मिक चित्र अंकित हुआ है। ' रंगभूमि ',  सेवासदन', 'निर्मला', आदि उपन्यासों ने प्रेमचंद्र जी और उनकी कला को अमर बना दिया है। सचमुच, प्रेमचंद्र  जी का साहित्य पढ़ने से सद्गुण  और अच्छे संस्कार प्राप्त होते है।

            प्रेमचंद्र जी का चरित्र चित्रण अनूठा है। कथोपकथन भी बहुत स्वाभाविक और सुन्दर है। चलती फिरती मुहावरेदार भाषा उनकी सबसे बड़ी विशेषता है। गाँधी जी के विचारो का प्रेमचंद  पर  भारी असर पड़ा है, सत्याग्रह और असहयोग आंदोलन ने उनकी रचनाओं को काफी प्रभावित किया है।

            प्रेमचंद जी के साहित्य में राष्ट्रीय जागरण का महान संदेश और हमारे सामाजिक जीवन के आदर्शो का निरूपण है। देशप्रेम के आदर्शो की झलक है। गुलामी का विरोध और राष्ट्र की उन्नत बनाने के प्रेरणा है। उनकी कलम जाति-पाती या ऊंच-नीच  के भेदभाव तथा प्रांतीयता आदि सामाजिक बुराइयों को दूर करने की सदा कोशिश करती रही थी। साहित्य सूजन द्वारा वे हिन्दू और मुसलमानो की एकता के लिए हमेशा प्रयत्न करते रहे। इस प्रकार साहित्यकार के साथ वे बहुत बड़े समाज सुधारक भी थे।

           लोकजीवन के ऐसे महँ कथाकार और सच्चे साहित्यकार प्रेमचंद्र जी यदि मेरे प्रिय लेखक है तो इसमें क्या आश्चर्य?
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