Himanshu Yadav अगर परीक्षाएँ न होती निबंध | Agar Pareekshaen Na Hoti Essay | StatusWhatsapp.IN - Download Whatsapp Status Video - Love | Attitude | Sad | Romantic | Tamil | Bhojpuri | Marathi

अगर परीक्षाएँ न होती निबंध | Agar Pareekshaen Na Hoti Essay | StatusWhatsapp.IN


अगर परीक्षाएँ न होती 


Agar Pareekshaen Na Hoti Essay


            आजकल विद्यार्थीओ को परीक्षाओ का लगातार सामना करना पड़ता है। उन्हे दम लेने का अवकास नहीं मिलता। साप्ताहिक, मासिक, मान्द्यसंत्रात, संत्रात या वार्षिक परीक्षाओ का बहुत उन पर हमेशा सवार रहता है। अगर ये परीक्षाएँ न होती तो सभी विद्यार्थी मारे ख़ुशी के फुले न समाते। परीक्षा की बला उनके सर पर न होने से वे सदा 'पिकनिक', 'पार्टी', 'फिल्म' का मजा लुटते रहते। फिर दिन रात एक कर आँख फोड़ने की उन्हें जरूत ही नहीं पड़ती।  

            परीक्षाएँ वास्तव में विद्यार्थी के ज्ञान की नहीं, बल्कि उनकी स्मरण शक्ति की कसौटियों पर गयी है। परीक्षाओं के कारन ही विद्यार्थी केवल मार्गदर्शिकाओं पर नर्भर रहने लगे है, उनमे विषय का गहरा ज्ञान पाने की चाह नहीं रहती। परीक्षा के लिए अपेक्षित या महत्वपूर्ण प्रश्नो के पीछे वे पागल से हो जाते है। किसी भी तरह अच्छे अंक पाकर परीक्षा पास कर  प्रमाणपत्र प्राप्त करना ही उनका लक्ष्य बन गया है। यदि परीक्षाएँ न होती तो बेचारे विद्यार्थीओ को डिग्रियाँ पाने के लिए सिर न खपाना पड़ता।

            यदि परीक्षाएँ न होती तो मध्यवर्ग के लोगों को पेट काटकर ट्यूशन रखने की आवश्यकता न होती। विद्यार्थीओ को महँगे ट्यूशन-क्लासो में दाखिला न लेना पड़ता। महँगी मार्गदर्शिओ, अपेक्षित प्रश्नसंग्रह आदि पर होने वाला खर्च भी बच जाता। माता-पिता बार-बार अपनी संतानो को पढाई करने के लिए न टोकते। परीक्षकों को घूस देने या अन्य अनुचित उपाय आजमाने की नौबत नहीं आती। परीक्षकों की लापरवाही से विद्द्यार्थीओ के जीवन बरबाद न होते। विद्यार्थीओ को परीक्षा भवन में नक़ल नहीं करने की जरुरत नहीं पड़ती। परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने पर आत्महत्या करने की करुण घटनाएँ भी न घटती। परीक्षा न होने पर विद्यार्थी चिंतामुक्त होकर विविध खेलो में भाग लेते। वे संगीत, नित्य, नाट्य, आदि ललितकलाओं में कुशलता प्राप्त करते। विद्यार्थी केवल किताबी कीड़े ही न रहकर अपना बहुमुखी विकाश कर पाते। 

            किन्तु यह तो सिक्के का एक ही पहलु है। यदि परीक्षाएँ न होती तो सभी विद्यार्थीओ को अगली श्रेणी में प्रवेश देना पड़ता। विद्यार्थीओ द्वारा अर्जित ज्ञान का पता कैसे लगाया जाता ? बिना परीक्षा के अनेक विद्यार्थी लापरवाह हो जाते और वे कभी किसी विषय को पढ़ने या सिखने का कष्ट ही नहीं उठाते। परीक्षा के माध्यम से ही विद्यार्थी अपनी योग्यता को परख सकते है, जिससे उनमे एक प्रकार की लगन बनी रहती है। इस तरह परीक्षा बिलकुल अनावश्यक नहीं है।


Related Articles:


Powered by Blogger.